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Saturday, September 19, 2009

क्या है डुअल लिस्टिंग? क्या भारत में है इसकी इजाजत?

डुअल लिस्टिंग उस प्रक्रिया को कहते हैं, जिसके तहत कोई कंपनी दो अलग-अलग देशों के स्टॉक एक्सचेंजों में खुद को सूचीबद्ध कराती है। जब दो देशों की दो कंपनियों के बीच कारोबार को लेकर समझौता होता है तो डुअल लिस्टिंग के जरिए दोनों ही देशों में इन कंपनियों के शेयर सूचीबद्ध बने रहते हैं। यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों ही देशों के स्टॉक एक्सचेंजों में दोनों ही कंपनियों के शेयरों की खरीद-बिक्री की जा सकती है। दूसरे शब्दों में यदि भारती एयरटेल और एमटीएन के बीच होने वाले सौदे में डुअल लिस्टिंग की शर्त शामिल होती है तो भारती के शेयरों की बिक्री जोहानसबर्ग स्टॉक एक्सचेंज में की जा सकेगी, जबकि एमटीएन के शेयर ट्रेडिंग के लिए घरेलू स्टॉक एक्सचेंज में उपलब्ध रहेंगे।
अभी कितनी कंपनियों में डुअल ट्रेडिंग होती है?

डुअल लिस्टिंग में कई जटिलताएं हैं, जिसके चलते यह ज्यादा लोकप्रिय नहीं है। हालांकि, डुअल लिस्टिंग के कई उदाहरण हैं। रॉयल डच शेल के शेयरों में इंग्लैंड और नीदरलैंड के शेयर बाजारों में ट्रेडिंग होती है। बीएचपी बिलिटॉन के शेयरों में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में ट्रेडिंग होती है। इसी तरह रियो टिंटो ग्रुप के शेयरों की ट्रेडिंग भी ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बाजरों में होती है। यूनिलीवर के शेयरों की ट्रेडिंग इंग्लैंड और नीदरलैंड के बाजारों में होती है।

क्या भारत में डुअल लिस्टिंग की इजाजत है?

अभी भारत में डुअल लिस्टिंग की इजाजत नहीं है। इसके लिए देश के कंपनी कानून में बड़े संशोधन करने पड़ेंगे। इसके अलावा रुपए को पूर्ण परिवर्तनीय बनाना होगा। डुअल लिस्टिंग में कोई निवेशक एक देश में शेयरों को खरीदकर दूसरे देश में बेच सकता है। इसके लिए रूप को पूर्ण परिवर्तनीय बनाना जरूरी है। विदेशी मुद्रा विनिमय अधिनियम (फेमा) में भी संशोधन करना होगा। इसके अलावा रिजर्व बैंक की इजाजत के बगैर विदेशी मुद्रा में कारोबार वाले शेयरों की ट्रेडिंग घरेलू बाजार में नहीं की जा सकती है।

अभी ऐसा लगता है कि भारती और एमटीएन के बीच प्रस्तावित सौदे में डुअल लिस्टिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, यदि ऐसा होता है तो भारती के शेयरों को जोहानसबर्ग स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कराना होगा, जबकि एमटीएन की लिस्टिंग बीएसई और एनएसई में करानी पड़ेगी। इसके अलावा कंपनियों को विदेशी कंपनियों के समान अपने बोर्ड का गठन करने के लिए सरकार की मंजूरी हासिल करनी होगी।
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